बेटी विलाप / भिखारी ठाकुर

भिखारी ठाकुर 0 Subscribers
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@bhikhari_thakur • 25 Views • 8 अप्रैल, 2026

गिरिजा-कुमार!, करऽ दुखवा हमार पार;
ढर-ढर ढरकत बा लोर मोर हो बाबूजी।
पढल-गुनल भूलि गइलऽ, समदल भेंड़ा भइलऽ;
सउदा बेसाहे में ठगइलऽ हो बाबूजी।


केइ अइसन जादू कइल, पागल तोहार मति भइल;
नेटी काटि के बेटी भसिअवलऽ हो बाबूजी।
रोपेया गिनाई लिहलऽ, पगहा धराई दिहलऽ;
चेरिया के छेरिया बनवलऽ हो बाबूजी।


साफ क के आँगन-गली, छीपा-लोटा जूठ मलिके;
बनि के रहलीं माई के टहलनी हो बाबूजी।
गोबर-करसी कइला से, पियहा-छुतिहर घइला से;
कवना करनियाँ में चुकली हों बाबूजी।


बर खोजे चलि गइलऽ, माल लेके घर में धइलऽ;
दादा लेखा खोजलऽ दुलहवा हो बाबूजी।
अइसन देखवलऽ दुख, सपना भइल सुख;
सोनवाँ में डललऽ सोहागावा हो बाबूजी।


बुढऊ से सादी भइल, सुख वो सोहाग गइल;
घर पर हर चलववलऽ हो बाबूजी।
अबहूँ से करऽ चेत, देखि के पुरान सेत; डोला
काढ़ऽ, मोलवा मोलइहऽ मत हो बाबूजी।


घूठी पर धोती, तोर, आस कइलऽ नास मोर;
पगली पर बगली भरवलऽ हो बाबूजी।
हँसत बा लोग गॅइयाँ के, सूरत देखि के सँइयाँ के;
खाइके जहर मरि जाइब हम हो बाबूजी।


खुसी से होता बिदाई, पथल छाती कइलस माई;
दूधवा पिआई बिसराई देली हो बाबूजी।
लाज सभ छोडि़ कर, दूनो हाथ जोडि़ कर;
चित में के गीत हम गावत बानीं हो बाबूजी।


प्राणनाथ धइलन हाथ, कइसे के निबही अब साथ;
इहे गुनि-गुनि सिर धूनत बानी हो बाबूजी।
बुद्ध बाड़न पति मोर, चढ़ल बा जवानी जोर;
जरिया के अरिया से कटलऽ हो बाबूजी।


अगुआ अभागा मुँहलागा अगुआन होके;
पूड़ी खाके छूड़ी पेसि दिहलसि हो बाबूजी।
रोबत बानी सिर धुनि, इहे छछनल सुनि;
बेटी मति बेंचक दीहऽ केहू के हो बाबूजी।


आपन होखे तेकरो के, पूछे आवे सेकरों के;
दीहऽ मति पति दुलहिन जोग हो बाबूजी।

Purvaiya
भिखारी ठाकुर @bhikhari_thakur

गिरिजा-कुमार!, करऽ दुखवा हमार पार;
ढर-ढर ढरकत बा लोर मोर हो बाबूजी।
पढल-गुनल भूलि गइलऽ, समदल भेंड़ा भइलऽ;
सउदा बेसाहे में ठगइलऽ हो बाबूजी।

केइ अइसन जादू कइल, पागल तोहार मति भइल;
नेटी काटि के बेटी भसिअवलऽ हो बाबूजी।
रोपेया गिनाई लिहलऽ, पगहा धराई दिहलऽ;
चेरिया के छेरिया बनवलऽ हो बाबूजी।

साफ क के आँगन-गली, छीपा-लोटा जूठ मलिके;
बनि के रहलीं माई के टहलनी हो बाबूजी।
गोबर-करसी कइला से, पियहा-छुतिहर घइला से;
कवना करनियाँ में चुकली हों बाबूजी।

बर खोजे चलि गइलऽ, माल लेके घर में धइलऽ;
दादा लेखा खोजलऽ दुलहवा हो बाबूजी।
अइसन देखवलऽ दुख, सपना भइल सुख;
सोनवाँ में डललऽ सोहागावा हो बाबूजी।

बुढऊ से सादी भइल, सुख वो सोहाग गइल;
घर पर हर चलववलऽ हो बाबूजी।
अबहूँ से करऽ चेत, देखि के पुरान सेत; डोला
काढ़ऽ, मोलवा मोलइहऽ मत हो बाबूजी।

घूठी पर धोती, तोर, आस कइलऽ नास मोर;
पगली पर बगली भरवलऽ हो बाबूजी।
हँसत बा लोग गॅइयाँ के, सूरत देखि के सँइयाँ के;
खाइके जहर मरि जाइब हम हो बाबूजी।

खुसी से होता बिदाई, पथल छाती कइलस माई;
दूधवा पिआई बिसराई देली हो बाबूजी।
लाज सभ छोडि़ कर, दूनो हाथ जोडि़ कर;
चित में के गीत हम गावत बानीं हो बाबूजी।

प्राणनाथ धइलन हाथ, कइसे के निबही अब साथ;
इहे गुनि-गुनि सिर धूनत बानी हो बाबूजी।
बुद्ध बाड़न पति मोर, चढ़ल बा जवानी जोर;
जरिया के अरिया से कटलऽ हो बाबूजी।

अगुआ अभागा मुँहलागा अगुआन होके;
पूड़ी खाके छूड़ी पेसि दिहलसि हो बाबूजी।
रोबत बानी सिर धुनि, इहे छछनल सुनि;
बेटी मति बेंचक दीहऽ केहू के हो बाबूजी।

आपन होखे तेकरो के, पूछे आवे सेकरों के;
दीहऽ मति पति दुलहिन जोग हो बाबूजी।

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