रउवा रुठ गइनी तऽ मनाईब कइसे

किरण शर्मा
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210 Views • अप्रैल 8, 2026

रउवा रुठ गइनी तऽ मनाईब कइसे,
जवन परल दरार भराईब कइसे।

हमहु चुप रहब आ रउवो चुप रहब,
तऽ चुपी के दीवार गिराईब कइसे।

बात छोटी-छोटी जे दिल से लगायब,
तऽ नाता इ आगे निभाईब कइसे।

खिसिया के कोहबर में बइठल रहब तऽ,
इ रिस्ता के आगे बढ़ाईब कइसे।

ना रउवा ही राजी ना हमही ही राजी,
तऽ माफी के हाथ बढ़ाईब कइसे।

डूबल बा इ दिल याद के समंदर में,
तऽ टूटत ई धीरज बँधाईब कइसे।

अहम रउवो में बा, अहम हमरो में बा,
तऽ ई “अहम” के मिल के हराईब कइसे।

जिंदगी तऽ केहू के मिलल ना सदा के,
तऽ तन्हा ई लम्हा बिताईब कइसे।

मूँद जाई आँखी जो दुनु में से केहू के,
तऽ ‘किरन’ फेर धैर्य बँधाईब कइसे।