सतावेले दुनिया, रोवावेले दुनिया
नया रोज चेहरा, देखावेले दुनिया।
भरल पेट जेकर, सुतेला ऊ सुख से
गला भूख के तऽ, दबावेले दुनिया।
भले आग लागल, पड़ोसी के घर मे
तमाशा खड़ा सब, करावेले दुनिया।
ई कागज के नोटन, के बा खेल सारा
ई रिस्ता के सूली, चढ़ावेले दुनिया।
कहाँ साँच बोले, के हिम्मत बा केहु में
बस अब झूठो के , सजावेले दुनिया।
सचाई के रस्ता, कठिन बा हमेशा
‘विनायक’ई साँचो, बतावेले दुनिया।




