अब झूठ के कमाई करे लगनी
अब झूठ के कमाई करे लगनी
काहे साँच के तुरपाई करे लगनी
हिस्सा में जब एगो पोखरा मिलल
तब समुंदर के बुराई करे लगनी
कबहूँ मुश्किल में साथ ना देहनी
आज काहे भाई-भाई करे लगनी
जब बात उठल सियासत के इहाँ
तब आपस में लड़ाई करे लगनी
पसीना के रंग जब फीका पड़ल
जी-हजूरी के पुताई करे लगनी
जेकर साया में ‘नूरैन’ जिनगी बीतल
ओही पेड़ के कटाई करे लगनी