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बाबा साहेब के तू करिहऽ, गुणगान बबुआ
4 महीना पहले
धूप चटके त अमृत के निसानी चाहीं
4 महीना पहले
झूठ बोलल आजकल शान में गिनाता
4 महीना पहले
याद त अइबे करी घरी-घरी
4 महीना पहले
त थम गइल कविता के कारवां: आज होखे वाला ‘माटी मुक्तक महोत्सव’ रद्द
4 महीना पहले
माथे पर गमछा सजावल गइल बा
4 महीना पहले
आव एगो नया बस्ती बसावल जाव
4 महीना पहले
राम जी के भइले जनमवा हो रामा, दशरथ के भवनवा
4 महीना पहले
चहकेला घरवा दुआरवा हो रामा अइलें सजनवाँ
4 महीना पहले
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,बैरी पलँगवा
4 महीना पहले
हहरा के बहेला चइत में बयरिया
4 महीना पहले
कुहुके करेजवा में हमरो करेजवा, एजवा मारिये दिहलs
4 महीना पहले
केकरा चिंता बाटे ए भइया, असल मे एगो बिहारी के
4 महीना पहले
ई बात हवा के खल रहल बा
4 महीना पहले
चईत बुझात कहां बा
4 महीना पहले
रहि-रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
5 महीना पहले
रेशम के कीड़ा के तरे खुदहीं बनावत जाल बा
5 महीना पहले
कबहूँ लिखा सकल ना तहरीर जिन्दगी के
5 महीना पहले
दरिया के बीच बइठ के कागज के नाव में
5 महीना पहले
ना रहित झाँझर मड़इया फूस के
5 महीना पहले
देखलीं जे बइठि के दरिया किनारे
5 महीना पहले
बात पर बात होता बात ओराते नइखे
5 महीना पहले
हियरा में फूल बन के खिले कौनो-कौनो बात
5 महीना पहले
बहुत नाच जिनिगी नचावत रहल
5 महीना पहले
अबकी दियरी के परब अइसे मनावल जाए
5 महीना पहले
भँवर में डूबियो के आदमी उबर जाला
5 महीना पहले
मन के मार के जियल भी मुश्किल
5 महीना पहले
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