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रोज का तरे ओहू दिन इसकूल में पहुँचि के दस बरिस के मुनिया आपन सहेली लोगन के खुशखबरी देवे के ना भुलाइलि । ओइसे तऽ मुनिया के इसकूली नाम प्रेरणा हऽ बकिर घर में आ हित-नात के बीच इनकरा के लोग मुनिएँ बोलेला । मुनिया भिर रोज कऊनों न कऊनो खुशखबरी रहेला । जइसे आज हमरे बालकनी में एगो खूब सुन्नर उज्जर रंग के कबूतर आइल रहे या काल्हि हमरा छत पे एगो लाल रंग के सुग्गा आइल रहे । बकिर आज के खुशखबरी कुछ खास रहे मुनिया हँस-हँस के अपने एगो हमउम्र लइकी कृति के बतावत रहे- " जानती हो कृति न्अ...हमारे बालकनी के रोशनदान पर एक चिड़िया ने अपना घोंसला बनाया है और उसमें उसके दो प्यारे-प्यारे नन्हें बच्चे भी हैं । "

" सचमुच यार ।"
" और नहीं तो क्या...? मैं झूठ बोलती हूँ । "

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