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1

बतिया केहू के खल जाला-शम्श जमील

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शम्स जमील
1.6 Hazar पाठक • 5 महीना पहिले
जब कोई अपने प्यार या अपनापन भरी बातें करता है, तो अक्सर किसी न किसी के मन में जलन (इरखा) पैदा हो जाती है।
2

मन धधाइल गावें गइनी-ग़ज़ब के वायरल कविता,बिना पढ़े मत जाइए

मुकेश यादव "भावुक"
0.75 Hazar पाठक • 4 महीना पहिले
जब छूटल हास्य के व्यंग आ जुटल बढ़न महफिल, त जागल हास्य के रंग
3

चाहे गमछा फार के रहअ

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जमील मिर
0.70 Hazar पाठक • 4 महीना पहिले
चाहे गमछा फार के रहअ। चाहे तु झार के रहअ।। दिल मे अपने मुहब्बत के दिया एगो बार के रहअ।। ना प्यार ना बैर से ना आपन ना गैर से…
4

पईसा…. राघवेन्द्र प्रकाश “रघु”

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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'
0.55 Hazar पाठक • 5 महीना पहिले
पईसा बिना लोग देखअ,एक देने तड़पे।खाए के ना अन्न दाना,जीव देखअ डहके।। पईसा बा त लोग कइसे,पउवा पखारेला।नहाईला के बाद चढ़ी,धोतियों खंगारेला।। साच कही नईखे पईसा,अपनो खदेड़ेला।भुला के सब रिश्ता-धरम,सहियो…
5

चोट खा-खा के जिनिगी – कुमार अजय सिंह

कुमार अजय सिंह
0.47 Hazar पाठक • 3 महीना पहिले
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनललागल भगिया में अगिया, तबाही बनल घाव बड़हन भइलऽ, ऊ नाऽ जल्दी भरीजे डुबवलस ऊ मौका पर, हाथ का धरीऊ चिन्हलके आदमिया बा, डाही…
6

भोजपुरी में बात करीं, वायरल रचनाकर के कइसन निहोरा?

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शम्स जमील
0.47 Hazar पाठक • 4 महीना पहिले
वायरल कवि शम्स जमील के रचना वायरल हो रहल बा, त आईं देखि जा उहाँ के का कहल चाहत बानी।
7

मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार-ताजुद्दीन अंसारी

ताजुद्दीन अंसारी
0.46 Hazar पाठक • 5 महीना पहिले
छोड़े के ना परित कबहूं आपन घर दुआर।मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार। अपनन से बिछड़े के कबो दरद ना होइत।बीवी-बचवन के याद कर के दिल ना रोइत।आपन…
8

हमहि से प्रेम, हमहि से छुपावे के बा

मुकेश यादव "भावुक"
0.42 Hazar पाठक • 5 महीना पहिले
उसका मक़सद ही शायद मुझे तड़पाना है, क्योंकि उसके व्यवहार में दर्द ज़्यादा और अपनापन कम महसूस होता है। वो प्यार भी मुझसे ही करता है, और उसी प्यार को…
9

एक रूपिया के कीमत के कहानी

रिशु कुमार गुप्ता
0.38 Hazar पाठक • 4 महीना पहिले
जइसे गरमी में दिवाकर के,आ सस्ती में टमाटर के जइसे बिना धार के फरसा के,आ बिन मौसम के बरसा के जइसे बिना भुख के भात के,आ मेहंदी लागल हाथ के…
10

ए शीतलहरी काकी-डॉo यशवन्त केशोपुरी

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डॉo यशवन्त केशोपुरी
0.36 Hazar पाठक • 3 महीना पहिले
यह ठंड सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि मनुष्य की असहायता और प्रकृति की कठोरता का प्रतीक बन गई है। लोग राहत और शरण की तलाश में हैं, लेकिन शीतलहरी निर्दय होकर…
11

मितवा जबसे गांव हम छोड़नी-मुकेश यादव

मुकेश यादव "भावुक"
0.35 Hazar पाठक • 5 महीना पहिले
जबसे अपना गाँव, अपना घर-आँगन, अपना बचपन और अपनापन छोड़कर बाहर निकले हैं, तबसे किस्मत जैसे रूठ गई है। ना पहले जैसी खुशियाँ हैं, ना वो सुकून, ना वो अपनापन।
12

मन काहें अकुताइल बा

मुकेश यादव "भावुक"
0.33 Hazar पाठक • 5 महीना पहिले
भीतरे भीतर घवाहिल बा,बात समझ मे आइल बानेह वेह से सब दूर भइलमन काहें अकुताइल बा। चोरन के अब ज़ोर भइल,भीतरे भीतर शोर भइल,मुह गिरा के बइठल बाड़,का मन के…
13

कसक जीवन के…मन कबों थोर ना रहे

सुजीत पाण्डेय
0.32 Hazar पाठक • 4 महीना पहिले
सुजीत पाण्डेय बक्सर
14

अपने लोग अब पराया हो गइल

मुकेश यादव "भावुक"
0.31 Hazar पाठक • 1 दिन पहिले
अपने लोग अब पराया हो गइल। गांव से बरगद के सफाया हो गइल। मेल-जोल अब धतूरा सन जहरीला भइल, आम-अमरुद के स्वाद पुराना हो गइल। चिउंटी के चीनी खियावे वाला…
15

आदमी अब बेचारा बन गइल बा-रिशु कुमार गुप्ता

रिशु कुमार गुप्ता
0.28 Hazar पाठक • 5 महीना पहिले
मोबाइल फोन, जो कभी सिर्फ ज़रूरत की चीज़ था, आज इंसानों की ज़िंदगी पर हावी हो गया है। इंसान खुद सोचने-समझने वाला जीव था, लेकिन अब मोबाइल पर निर्भर होकर…
16

जिनिगिया ई अबले अन्हारे में बीतल-श्रद्धानन्द पाण्डेय

श्रद्धानंद पाण्डेय
0.27 Hazar पाठक • 3 महीना पहिले
हमेशा रहल नेह दियना बुताइल,जिनिगिया ई अबले अन्हारे में बीतल। हिया में रहल पीर अँखियनि में पानी,न जियरा के केहू सकल सुनि कहानी,न ओठनि प आइल कबो बात मन में,जिनिगिया…
17

हम का करीं, बुझाते नइखे-नूरैन अन्सारी

author
नूरैन अंसारी
0.26 Hazar पाठक • 5 महीना पहिले
हम का करीं, बुझाते नइखे. दुःख मुसीबत, जाते नइखे. दोसरा के छोड़ीं महाराज, आपन तऽ, सम्हराते नइखे. खेती कइनी नोकरी कइनी, कही कुछउ, पोसाते नइखे. हाल बताई हम केकरा से,…
18

हमनी के राति दिन दुखवा भोगत बानी-हीरा डोम

हीरा डोम
0.24 Hazar पाठक • 3 महीना पहिले
यह कविता महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा संपादित ‘सरस्वती’ (सितंबर 1914, भाग 15, खंड 2, पृष्ठ संख्या 512-513) में प्रकाशित हुई थी।
19

केकरा चिंता बाटे ए भइया, असल मे एगो बिहारी के

author
शम्स जमील
0.23 Hazar पाठक • 2 सप्ताह पहिले
कुल्हत मुसमात महतारी केसमाज के अपना नारी केकेकरा चिंता बाटे ए भइयाअसल मे एगो बिहारी के आवता जे भी खाता उहेबाड़ेन असली दाता उहेका कहीं सरकार के जीसवत आपन बुझाता…
20

याद त अइबे करी घरी-घरी

author
राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'
0.17 Hazar पाठक • 1 सप्ताह पहिले
याद त अइबे करी घरी-घरी,रिश्ता उ अलगे उफान पर रहल।नज़र लागल कवने मुदइया के रामा,बहल नयनन नीर जइसे बरखा रहल। पिरितिया हम तोहसे लगवले रहीं,सखी-सहेली में चर्चा कइले रहीं।बनबऽ तुही…
21

एक दिन बाद भेंट होइ, नाही केहू अब लेट होइ

author
शम्स जमील
0.17 Hazar पाठक • 2 सप्ताह पहिले
एक दिन बाद भेंट होईनाही केहू अब लेट होईकविता गीत गज़ल सेमंच ई काल्ह सेट होई भोजपुरी मे राखता जेनवहा लोगन के ठेल केअबकी बेर सुने के मिलीभइया संतोष पटेल…
22

ई बात हवा के खल रहल बा

author
नूरैन अंसारी
0.16 Hazar पाठक • 2 सप्ताह पहिले
ई बात हवा के खल रहल बा,कि काहे दीया जल रहल बा। रात अँहरिया साज़िश कईलस,तबहूँ सूरज निकल रहल बा। दुश्मन से हम बचत रह गइनी,अपनहीं लोगवा छल रहल बा।…
23

सब एहीजे मिली

author
राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'
0.16 Hazar पाठक • 1 दिन पहिले
सब एहीजे मिली ——————— मोर बाल बच्चा खूबे सुनर, ई घमंड रूप के पाली मत। दोसरा के करिया नकभेभर, मीन मेख अनका काढ़ी मत।। सुनरको जाइ बउरको जाइ, बिधना के…
24

चईत बुझात कहां बा

कुमार अजय सिंह
0.15 Hazar पाठक • 2 सप्ताह पहिले
चईत -चईत लेखा, बुझात कहां बा,बनिहार से कटनी, कटात कहां बा। शहरन में लोगवा लहर लूटत बा,गांवन में अब केहू जात कहां बा।ए. सी. किनाइल त देसी भुलाइल,खुला हवा अब…
25

धूप चटके त अमृत के निसानी चाहीं

author
गणेश नाथ तिवारी "विनायक"
0.14 Hazar पाठक • 1 सप्ताह पहिले
धूप चटके त अमृत के निसानी चाहीं,सोन्ह घइला के ओही में पानी चाहीं। ​जवन मिसरी घोल देला मन के भीतर,ओही सतुआ के सानल कहानी चाहीं। ​मेटावे घाम के तीताई जलन…
26

झूठ बोलल आजकल शान में गिनाता

author
नूरैन अंसारी
0.13 Hazar पाठक • 1 सप्ताह पहिले
झूठ बोलल आजकल शान में गिनाताअब त लेड के पेड़ भी परधान में गिनाता हो गईल ईमानदारी घर-घर में मूसमातअब दर्द के दवा भी एहसान में गिनाता भाषण जे देत…
27

देश के काहे नीचा दिखावत बाड़अ?

author
राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'
0.12 Hazar पाठक • 2 सप्ताह पहिले
खात-कमात जब इहँवा बाड़अ,दोसरा के काहे बखानत बाड़अ?बा खटास जब सरकार से,देश के काहे नीचा दिखावत बाड़अ? का तू बनबअ बड़का नेता,हिन्दू-हिन्दू से लड़ावत बाड़अ?देश के नास कइके जमापूंजी,काहे दोसरा…
28

रउवा रुठ गइनी तऽ मनाईब कइसे

author
किरण शर्मा
0.12 Hazar पाठक • 2 सप्ताह पहिले
रउवा रुठ गइनी तऽ मनाईब कइसे,जवन परल दरार भराईब कइसे। हमहु चुप रहब आ रउवो चुप रहब,तऽ चुपी के दीवार गिराईब कइसे। बात छोटी-छोटी जे दिल से लगायब,तऽ नाता इ…
29

कहाँ केहु दिल में उपकार राखत बा

author
नूरैन अंसारी
0.12 Hazar पाठक • 10 घंटे पहिले
कहाँ केहु दिल में उपकार राखत बा मतलब से ख़ाली सरोकार राखत बा बस गरज ले बाटे सब रिश्ता – नाता बेगरज कहा कौनो दरकार राखत बा जेकरा के लोग…
30

कुहुके करेजवा में हमरो करेजवा, एजवा मारिये दिहलs

author
गणेश नाथ तिवारी "विनायक"
0.12 Hazar पाठक • 2 सप्ताह पहिले
कुहुके करेजवा में हमरो करेजवाएजवा मारिये दिहलsदेबे के परित दहेजवाएजवा …….. कवन कसूर हमार तनिका बतइतिएगो रहे सोना एगो चानियो अपनइतिपरी गइनी फेरा में पावे खातिर पुतवाएजवा…….. केतना हम सोंचनी…
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